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(1) सादृश्य पर आिाररत महावर - बहुत से महावर सादृश्य या समानता पर आिाररत होत ह।
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जस - चकडया पहनना, दाल न गलना, सोन पर सहागा, िदन-सा चमिना, पापड बलना आकद।
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(2) शारीररि अगोां पर आिाररत महावर - कहदी भाषा ि े अतगत इस वग में बहुत महावर कमलत े
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जस - अग-अग ढीला होना, आख चराना, अगठा कदखाना, आखोां से कगरना, कसर कहलाना, उगली
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उठाना, छाती पर साप लोटना, तलव चाटना, दात खट्ट िरना, नाि रगडना, पीठ कदखाना, मह
िाला िरना आकद।
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(3) असभव ब्दस्र्कतयोां पर आिाररत महावर - इस तरह ि े महावरोां में वाच्यार् ि े स्तर पर इस तरह
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िी ब्दस्र्कतया कदखाई दती हैं जो असभव प्रतीत होती ह।
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जस - पानी में आग लगाना, पत्थर िा िलजा होना, जमीन आसमान एि िरना, कसर पर पाव
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रखिर भागना, हर्ली पर सरसोां जमाना, हवाई किल बनाना, कदन में तार कदखाई दना आकद।
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(4) िर्ाओां पर आिाररत महावर - िछ महावरोां िा जन्म लोि में प्रचकलत िछ िर्ा-िहाकनयोां से
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होता ह।
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जस - टढी खीर होना, एि और एि ग्यारह होना, हार्ोां-हार् कबि जाना, साप िो द द ि कपलाना,
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रगा कसयार होना, दुम दबािर भागना, िाठ में पाव दना आकद।
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(5) प्रतीिोां पर आिाररत महावर - िछ महावर प्रतीिोां पर आिाररत होत ह।
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जस - एि आख से दखना, एि ही लिडी से हािना, एि ही र्ल ि े चट्ट-बट्ट होना, तीनोां महावरोां
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में प्रयक्त 'एि' शि 'समानता' िा प्रतीि ह।
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इसी तरह से डढ पसली िा होना, ढाई चावल िी खीर पिाना, ढाई कदन िी बादशाहत होना, में
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डढ तर्ा ढाई शि 'नगण्यता' ि े प्रतीि ह।
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(6) घटनाओां पर आिाररत महावर - िछ महावरोां ि े मल में िोई घटना भी रहती ह।
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जस - िाटा कनिालना, िाव-िाव िरना, ऊपर िी आमदनी, गड मद उखाडना आकद।
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उपयक्त भदोां ि े अलावा महावरोां िा वगीिरण स्रोत ि े आिार पर भी किया जा सिता ह। कहदी
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में िछ महावर सस्कत से आए हैं, तो िछ अरबी-फारसी से आए ह। इसि अकतररक्त महावरोां िी
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कवषयवस्त क्ा है, इस आिार पर भी उनिा वगीिरण किया जा सिता ह। जस- स्वास्थ्
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कवषयि, यद्ध कवषयि आकद। िछ महावरोां िा वगीिरण किसी ित्र कवशष ि े आिार पर भी

